सुरभि🌹🌹 श्रीवंत🖊🖊
Page
कविताऐं
My profile
बुधवार, 11 सितंबर 2019
उम्मीद
जीतनी उम्मीद से
चातक देखता है
बादल को
उतनी ही
उम्मीद से
देखती हूँ
पथ मैं
तेरे आगम की।
डॉ. अनिता सिंह
नई पोस्ट
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
Popular posts
हौले- हौले
हौले- -हौले ************ हौले -हौले से मेरे दिल में उतरने लगे तुम। अजनबी होकर भी अपना लगने लगे तुम।...
मुलाकात
कैसे कहूँ कि तुमसे मुलाकात नहीं होती । हर पल मिलते हैं तुमसे पर दिल की बात नहीं होती। कोई रात ऐसी नहीं जब आँखों से बरसात नहीं होती। कोई...
सौगात
तुम्हारे हाथों में मैने सौप दी हैं चाबियाँ तुम जाकर देख सकते हो मेरे दिल के तहखाने में। तुम्हारी दी हुई सभी सौगातों को मैने अब तक सहेज ...
दीया
दीया आओ सब मिलकर दीया जलाते हैं। उत्साह, उम्मीद, उमंग को लाते हैं । एकता, अखंडता के नाम पर जननी जन्मभूमि को चढ़ाते हैं। आओ सब...........
अश्रु
ऐ अश्रु तू आँखों की देहरी पर न आना। दुनिया के सारे गम को तू पलकों में छिपाना। जख्म अपने ना तू किसी को दिखाना। ढल जाओ आँखों से तो भी मुस्क...
प्राइवेट स्कूल के शिक्षक की व्यथा
प्राइवेट स्कूल --‐------- प्राइवेट स्कूल की व्यथा वह नहीं समझ है सकता । जो सरकारी पैसे से है पल्लवित -पुष्पित होता । कोरोना के खतरे ...