प्रार्थना
जिसका गुढ़ अर्थ है वह शब्द है प्रार्थना ।
जो ईश्वर को नमन है वही स्वर है प्रार्थना।
ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास है प्रार्थना।
मानव की करूण पुकार है प्रार्थना।
हृदय का निर्मल प्रवाह है प्रार्थना।
याचना के स्वर की आवाज है प्रार्थना।
दुखों में व्याकुल पुकार है प्रार्थना ।
सुखों में मन का उल्लास है प्रार्थना |
वेदना में सुखद अनुभूति है प्रार्थना ।
दिल के आहों की तृप्ति है प्रार्थना ।
ईश्वर के समक्ष मनुष्य का प्रश्न है प्रार्थना।
सुखद अनुभूति का ही प्रतिउत्तर है प्रार्थना।
निराकार को पाने दिव्य दृष्टि है प्रार्थना ।
सबमें समाया वही सृष्टि है प्रार्थना ।
डॉ.अनिता सिंह
रविवार, 29 नवंबर 2020
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Popular posts
-
मैने जिसे अनुभव किया वो अनुभूति हो तुम। जिस गंध का आघ्राण किया वो खुशबू हो तुम। जिसे स्नेह भाव से स्पर्श किया वो प्रणय हो तुम। जिसे दे...
-
झूठों की इस बस्ती में सच को यहाँ पहचाने कौन? अपने में ही उलझे लोग नियत किसी की जाने कौन ? एक चेहरे पर चेहरे अनेक सच्चा चेहरा तलाशे कौन...
-
जादू है तेरे आँखों में दिखता है तेरा चेहरा आँख बंद करने के बाद भी। जादू है तेरे स्पर्श में जिसे महसूस करती हूँ तेरे जाने के बाद भी । ज...
-
नयी पहल कोरोना की दूसरी लहर ने मेरे परिवार को पूरी तरह से बिखेर दिया था। माँ - बाबू जी दोनों को कोरोना ने अपने चपेट में ले लिया था। कोरोना...
-
तुझमें डूब गयी जाने कब मैं तुझमें डूब गई पा न सकी मैं तेरी थाह दुनिया के उथले रिश्ते में पाती हूँ तेरा स्नेह अथाह। कभी डूबती, कभी उतराती ...
-
फिजा़ से आती है तेरी खुशबू जब तुम दिल की गली से गुजर जाते हो। मेरा दिल तो तेरी यादों का घरौंदा है तुम यादों की चौखट में प्रवेश कर जाते हो...
bahut sundar. :-)
जवाब देंहटाएंधन्यवाद
हटाएं