प्राइवेट स्कूल
--‐-------
प्राइवेट स्कूल की व्यथा वह
नहीं समझ है सकता ।
जो सरकारी पैसे से है
पल्लवित -पुष्पित होता ।
कोरोना के खतरे के चलते बच्चों को
पढ़ाते हैं हम शिक्षकऑनलाइन ।
दिनभर मोबाइल पर माथापच्ची कर
देते हैं हम गाइड लाइन ।
शिक्षा ही नहीं संस्कारों के लौ भी
हम शिक्षक जगाते हैं ।
अभिभावकों से मिन्नत कर बच्चों को
ऑनलाइन बुलाते हैं ।
फिर भी शिक्षक की मेहनत को सभी ने नजरअंदाज किया ।
बच्चों की फीस न पटा कर इनके
पेट पर लात मार दिया ।
प्राइवेट स्कूलों की नहीं है
कोई मद और कमाई।
बच्चों के फीस से है होती इनके
तनख्वाह की भरपाई ।
इनकी मेहनत का अंदाजा आपको
कभी नहीं हो सकता ।
दिन भर मोबाइल कंप्यूटर के साथ
टीचिंग लर्निंग को अपनाता ।
कभी व्हाट्सएप ,कभी यूट्यूब चलाते हैं
सिग्नल नहीं मिले तब भी हम पढ़ाते हैं ।
पारिवारिक सुख संबंधों को ताक पर
रखकर कराते हैं पढ़ाई ।
सी बी एस ई के नियमानुसार चलते हैं
हम शिक्षक भाई ।
कहीं कोई कमी न रह जाए
ऑनलाइन पढ़ाई में ।
इसलिए पीडीएफ एवं वीडियो बनाने में
लगा देते हैं बची खुची कमाई ।
शिक्षक के मेहनत को सब ने
नजरअंदाज कर दिया है।
बच्चों को आॅनलाइन पढ़ाने में
हमने की जान लगा दिया ।
फिर भी पचास में से पच्चीस बच्चे ही
सिर्फ आते हैं ऑनलाइन ।
फिर भी इन के हित को ध्यान में रखकर
पढ़ाते हैं हम शिक्षक भाई ।
कोरोना में घर बैठकर भी
ज्ञान का दिया जलाते हैं।
हम शिक्षक बच्चों का भविष्य
सुधारने हेतु ऑनलाइन पढ़ाते हैं ।
कोरोना के संकट में सब कुछ
उथल -पुथल हो गया ।
शिक्षक का जीवन भी इसमें
कहीं बिखर गया ।
अब तक भविष्य निर्माता शिक्षकों की
कहीं किसी को सुध नहीं आई ।
पेट भरे तो भरे कैसे तनख्वाह के साथ
ट्यूशन की भी बंद है कमाई।
माता -पिता ,बीवी -बच्चे
सब लगाए आस हैं ।
दिन भर मेहनत करके भी
हम शिक्षक आज उदास हैं।
बच्चों के भविष्य सुधारने वालों का
भविष्य अंधकार में है ।
तनख्वाह के बिना विवश ,लाचार
प्राइवेट स्कूल का शिक्षक
कोरोना काल में है ।
डॉ .अनिता सिंह
सोमवार, 31 अगस्त 2020
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
Popular posts
-
मैं तुम्हें मित्रवत चाहती हूँ। तुम्हारे संग हर्षित होती हूँ, तुम्हारे ही संग रोती हूँ। चाहे तुम मुझे उल्लास दो चाहे तुम मुझे विषाद दो य...
-
हौले- -हौले ************ हौले -हौले से मेरे दिल में उतरने लगे तुम। अजनबी होकर भी अपना लगने लगे तुम।...
-
मेरी निंदा करने वाले तेरा अभिनंदन करती हूँ। तेरी ही निंदा से मैं हर पलआगे बढ़ती रहती हूँ। तेरी ही निंदा से मैं आहत भी होती रहती हूँ । तभी...
-
कैसे कहूँ कि तुमसे मुलाकात नहीं होती । हर पल मिलते हैं तुमसे पर दिल की बात नहीं होती। कोई रात ऐसी नहीं जब आँखों से बरसात नहीं होती। कोई...
-
जाने क्या -क्या भूल गयी जाने क्या -क्या याद रखी हूँ। जो कुछ भी लिखा है मैने सब तुमसे मिलने के बाद लिखी हूँ। कुछ भूली -बिसरी यादें थीं ...
-
ऐ दर्पण! लोग कहते हैं कि तू झूठ नहीं बोलता। लेकिन तुम केवल अर्धसत्य हो। कयोंकि तुम तो सिर्फ तन को प्रतिबिम्बित करते हो। मन को नहीं । ...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें