वृद्धाश्रम
ऐसा क्या गुनाह किया कि,
सबने मुझे छोड़ दिया।
पाला था जिसे प्यार से इतना,
उसने ही दिल तोड़ दिया।
परिवार से ही खुशियाँ थी,
पर परिवार ने ही मुंह मोड़ लिया।
कहाँ गए संस्कारों के मोती,
क्यों सबने उसे बिखेर दिया।
कहाँ रह गयी परवरिश में कमी,
जो अपनों ने ही छोड़ दिया।
जहाँ बसती थी खुशियाँ हर दिन,
वह निकेतन सबने तोड़ दिया।
जिसका भगवान के बाद दूजा स्थान,
उन्हें क्यों वृद्धाश्रम में ढकेल दिया।
बना छत्र छाया यह वृद्धाश्रम,
जिसने टूटे दिलों को जोड़ दिया।
डॉ. अनिता सिंह
बिलासपुर (छत्तीसगढ)
सोमवार, 30 नवंबर 2020
रविवार, 29 नवंबर 2020
प्रार्थना
प्रार्थना
जिसका गुढ़ अर्थ है वह शब्द है प्रार्थना ।
जो ईश्वर को नमन है वही स्वर है प्रार्थना।
ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास है प्रार्थना।
मानव की करूण पुकार है प्रार्थना।
हृदय का निर्मल प्रवाह है प्रार्थना।
याचना के स्वर की आवाज है प्रार्थना।
दुखों में व्याकुल पुकार है प्रार्थना ।
सुखों में मन का उल्लास है प्रार्थना |
वेदना में सुखद अनुभूति है प्रार्थना ।
दिल के आहों की तृप्ति है प्रार्थना ।
ईश्वर के समक्ष मनुष्य का प्रश्न है प्रार्थना।
सुखद अनुभूति का ही प्रतिउत्तर है प्रार्थना।
निराकार को पाने दिव्य दृष्टि है प्रार्थना ।
सबमें समाया वही सृष्टि है प्रार्थना ।
डॉ.अनिता सिंह
जिसका गुढ़ अर्थ है वह शब्द है प्रार्थना ।
जो ईश्वर को नमन है वही स्वर है प्रार्थना।
ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास है प्रार्थना।
मानव की करूण पुकार है प्रार्थना।
हृदय का निर्मल प्रवाह है प्रार्थना।
याचना के स्वर की आवाज है प्रार्थना।
दुखों में व्याकुल पुकार है प्रार्थना ।
सुखों में मन का उल्लास है प्रार्थना |
वेदना में सुखद अनुभूति है प्रार्थना ।
दिल के आहों की तृप्ति है प्रार्थना ।
ईश्वर के समक्ष मनुष्य का प्रश्न है प्रार्थना।
सुखद अनुभूति का ही प्रतिउत्तर है प्रार्थना।
निराकार को पाने दिव्य दृष्टि है प्रार्थना ।
सबमें समाया वही सृष्टि है प्रार्थना ।
डॉ.अनिता सिंह
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ (Atom)
Popular posts
-
संस्कार पढ़ना और पढ़ाना मेरा शौक ही नहीं बल्कि मेरा जुनून है इसीलिए मैंने शिक्षकीय पेशे का चुनाव किया। बच्चे सिर्फ मुझसे ही नह...
-
लॉकडाउन 14 मार्च 2020 को मैं प्रोफेसर पद से सेवानिवृत्त हुई और 22 मार्च 2020 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी न...
-
सच -झूठ झूठ ने एक दिन सच से पूछा क्यों होती है दुनिया में सच-झूठ की लड़ाई? सच ने मासूमियत से जवाब दिया -- जो बोलते हैं ,सच का साथ दो व...
-
क्यों मुझे मिल गये तुम कहानी बनकर। दिल में बस गए निशानी बनकर । रहते हो धड़कनो में जिंदगानी बनकर । नयनो से ढुलक जाते हो पानी बनकर । नींदो...
-
प्राइवेट स्कूल --‐------- प्राइवेट स्कूल की व्यथा वह नहीं समझ है सकता । जो सरकारी पैसे से है पल्लवित -पुष्पित होता । कोरोना के खतरे ...