प्रखर हैं, आलोकित हैं, देदीप्यमान हैं पिता ।
शांत हैं शीतल हैं, प्रकाशमान हैं पिता।।
सरल हैं गंभीर हैं, एकसार हैं पिता ।
स्नेह हैं, बंधन हैं, प्यार हैं पिता ।।
आराध्य हैं,उपासक हैं,भगवान हैं पिता।
जीवन हैं, संभल हैं, सम्मान हैं पिता ।।
घर हैं, परिवार हैं, संसार हैं पिता ।
छत हैं, छाया हैं, सहारा हैं,पिता ।।
पालन हैं, पोषण हैं, परिवार हैं, पिता ।
शक्ति हैं, भक्ति हैं, संस्कार हैं, पिता ।।
घने अंधेरे के सम्मुख चमकती धूप हैं पिता ।
जीवन में आती रोशनी के सदृश हैं पिता ।।
पिता हैं तो सर्वस्य मान सम्मान हैं ।
पिता से ही आन बान और शान हैं ।।
पिता हैं तो बच्चों का जीवन चाँदनी रात हैं ।
पिता से ही खुशहाल सारा परिवार हैं ।।
पिता बगैर जीवन का कोई अर्थ नहीं ।
पिता हैं तो बच्चों का जीवन कभी व्यर्थ नहीं ।।
डाॅ. अनिता सिंह
मंगलवार, 21 अप्रैल 2020
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