बुधवार, 11 सितंबर 2019

उम्मीद

जीतनी उम्मीद से
चातक देखता है
बादल को
उतनी ही
उम्मीद से
देखती हूँ
पथ मैं
तेरे आगम की।

डॉ. अनिता सिंह

शनिवार, 31 अगस्त 2019

बेटी

आज बेटी कैसे घृणित
वातावरण में घुट रही है।
भारत जैसे देश में
उसकी अस्मत लुट रही है।
क्यों? बेटी -बहन के रिश्ते
हो गये हैं बेगाने।
करने लगे हैं अनाचार
सब जाने -पहचाने।

डॉ. अनिता सिंह
बिलासपुर

रविवार, 25 अगस्त 2019

द्रौपदी

बेटियों पर पाबंदी लगाते हो कि
छोटे कपड़े मत पहना करो बाजारों में ।
कैद रहो घर की चारदीवारों में।
द्रौपदी तो लिपटी थी पाँच गज की साड़ी में ।
फिर क्यों लुट गयी थी घर की चारदीवारी में ।
गली -गली में दुशासन की भरमार है ।
फिर भी कहते हो बेटी भारत में आजाद है।

डॉ. अनिता सिंह
बिलासपुर

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