गुरुवार, 30 नवंबर 2017

मुक्तक

   माँ  तुम  मेरी  माँ   हो,
   मुझे  आशीष  दिया करो।
   जग की उलझन  भूल  सभी,
   मेरे उर(हृदय)में रहा  करो।
                 डॉ. अनिता सिंह

मुक्तक

सच और झूठ की पाठशाला अजीब है ।
सच और झूठ का भी अपना नसीब है ।
देख हैरान हो जाती हूँ दोनो का व्यवहार,
मौन रहकर भी सच दूर और झूठ करीब है ।
                           डॉ. अनिता सिंह

मुक्तक

नदान दिल तुझे समझा लूँ तो चैन आए ।
उनकी बेरूखी पर आँसू बहा लूँ तो चैन आए ।
उनके जुल्मों सितम का क्या शिकवा करूँ,
एक बार उन्हे गले लगा लूँ तो चैन आए ।
                              डॉ. अनिता सिंह

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