वर्षों में
मैं सपना सुकुमार तुम्हारा
पोषित करती हूँ पलकों में।
बीत रहा है पल पल हर दिन
रहते हो तुम अश्कों में।
तेरे प्रीत में डूब रही हूँ
पिछले कितने वर्षों में।
पल पल देख रही पथ तेरा
क्या आओगे तुम वर्षों में।
शनिवार, 22 जून 2019
वर्षों में
मंगलवार, 28 मई 2019
अक्षर
कहाँ कहाँ छिपे रहते हैं अक्षर
होता है इनका मिलन तो शब्द बन जाते हैं अक्षर
जब कागज पर उभर आतें हैं
तब जीवंत बन जातें हैं अक्षर ।
ये खुरदरे अक्षर स्निग्धता का एहसास कराते हैं
अक्षरों की सुनो ये विश्वास दिलातें हैं।
कभी अजान की ध्वनियों में गुँजते
कभी प्रार्थना के मंत्र बन जाते अक्षर ।
कभी बजते हैं मधुर घंटी बनकर
कभी युद्ध वाद्य बन चहुँ ओर पसर जाते अक्षर।
अक्षरों में ही तो छिपा है पीड़ा और प्रीत
अक्षर ही निभा जाते हैं नफरत की रीत।
अक्षरों की सुनो ये कुछ कहतें हैं
कुछ नयी कुछ पुरानी यादों को बुनते हैं।
इन अक्षरों को जब जब मैं गढ़ती हूँ
तब कुछ अनोखा सा मैं रचती हूँ।
डॉ. अनिता सिंह
28/5/2019
रविवार, 5 मई 2019
शब्द
शब्द सिर्फ शब्दकोश का
श्रृंगार ही नहीं होते हैं ।
शब्दों की अनंत दुनिया में
जब प्रवेश कर जाते हैं।
तब इन्हें असिमित हम पाते हैं
कुछ शब्द तो ख्वाबों से जगाते हैं।
कुछ शब्द आँसू बनकर बह जाते हैं।
कुछ जिस्म को गहरा जख्म दे जाते हैं।
कुछ हौले - हौले से मुस्काते हैं।
कुछ प्रिय की मीठी याद दिलाते हैं।
डॉ. अनिता सिंह
05/05/2019
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