मंगलवार, 6 फ़रवरी 2018

स्पर्श

तेरे स्पर्श की स्मृतियाँ
दिल में हलचल मचा देती हैं।
सुने जीवन में मुस्कान खिला देती हैं।
मुझे तुम्हारे स्पर्श की आवाजें
अभी भी सुनाई देती हैं।
तुम्हारी अनुपस्थिति में
मैं तुम्हारे स्पर्श को
कागज पर उतारती हूँ।
मन ही मन पढ़ती हूँ।
दिल से महसूस करती हूँ
तुम्हारे स्पर्श की अनुभूति को।

डॉ. अनिता सिंह

रविवार, 4 फ़रवरी 2018

पत्थर बन जाऊँ

काश! तुम्हारी तरह मैं भी
पत्थर बन जाऊँ।
तुम हो मेरी तरह बेचैन
और मैं तुमको तड़पाऊँ।

समाकर तेरी साँसों में
तेरे दिल को भी धड़काऊँ।
बेचैन हो तुम खोजो मुझको
मैं खुशबू सी उड़ जाऊँ।

हर पथ में तुम तलाशो मुझे
पर मैं ना तुझे नज़र आऊँ।
हो जाए गर तुमसे सामना
बिन बोले ही मैं भी आगे बढ़ जाऊँ।

बंद आँखों से जब महसूस करो तुम
मैं आँखों से अश्रु बन ढुलक जाऊँ।
ख्वाबों जब तुम मुझे प्यार करो
तेरे बाहों से परे मैं भी हो जाऊँ।

काश! तुम्हारी तरह मैं भी
पत्थर बन जाऊँ।
फिर कभी ना तुझे याद करूँ
ना फिर तेरी याद में
नयन नीर छलकाऊँ।
काश!.....................।

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

बेपनाह.......

दर्द से तपते बंजर में
शीतल ठंडक सी है तेरी याद।
मैं ओढ़ा देना चाहती हूँ
तुम्हें अपनी चाहत की चादर।
चुपके से थाम लेती हूँ
तुम्हारा हाथ अपने हाथ में।
तुम जानते नहीं हो
मेरे दिल में छिपा एक राज
जो तुम्हें चाहता है बेपनाह..........।

डॉ. अनिता सिंह

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