शुक्रवार, 10 अगस्त 2018

जब याद आते हो तुम......

जब याद आते हो तुम...............
दिल की धड़कने शोर करने लगती हैं।
आँखों से निर्मल सरिता बहती है।

उदासीनता के बादल घेर लेते हैं।
स्मृतियों के काँटे नश्तर से चुभने लगते हैं।

याद करती हूँ वो हर लम्हा...........
कैसे तुम मेरे इतने करीब आकर
आज मुझसे दूर चले गए।
कैसे एक खूबसूरत रिश्ते को
तुम नफरत में बदल गए ।

मेरा मन अभी भी तेरे ही प्रेम में डूबा है।
यह तो वर्फीली घाटी का वह रास्ता था
जहाँ से यदि कोई गुजरे तो
उन्हें लौटने का कोई रास्ता न था
फिर तुम क्यों और कैसे नये रास्ते खोज लिए।

डॉ. अनिता सिंह
1o/8/2018

रविवार, 5 अगस्त 2018

तलाश.....

हे प्रभु! तुम्हारी तलाश में
मैने जिंदगी गुजार दिया ।
तुम्हारे होने के अहसास ने
मुझे रोमांचित कर दिया।
तेरी ही अनुभूति में मैने
हर लमहां बिता दिया।
लेकिन तुम वैसे नहीं हो
जैसा मैने सोचा था।
तुमने मुझे अपने होने का
अहसास दिलाकर क्यों
अपने से दूर कर दिया ।

डॉ. अनिता सिंह
29/07/2018

दर्द की कहानी....

तेरे दिए जख्मों ने मेरी खुशियों को
दर्द में परिवर्तित कर दिया।
तेरे इंतजार में मेरा सुकून खो गया।
असीम दर्द देकर तू क्यों दूर हो गया।
गलत तो मैं भी नहीं थी
ये मेरे भाग्य का तकाजा था
जो तू मुझे गलत ठहरा गया ।
बना कर मित अपना
क्यों बेगाना कर गया।
कितना अच्छा होता न तुम मिलते
न दर्द की कहानी शुरू होती।

डॉ. अनिता सिंह
5/8/2018

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