रविवार, 2 सितंबर 2018

तेरी यादों का सपना

अब तेरी यादों का सपना
मन की आँखों में हरपल तिरता है ।
अब गीत -गजल और कविता में
मन तुझको ही ढूँढता फिरता है ।

मैं तेरे बिन तनहा अकेली हूँ
अब अपनी छाया से भी डरती हूँ।
तनहा रातों में सिसक-सिसक कर
तेरी तस्वीर से बातें करती हूँ।

झूठे सपने बुन-बुन कर
अब आँखें है हार गयी।
कैसे दिल की बात कहूँ
तुम तक न दिल की आवाज गयी।

भटक रही हूँ अहसासों के
उबड़ -खाबड़ राहों में ।
अब तनहा रस्ता तकती हूँ
आकर लेलो 'प्रभु 'अपनी बाहों में ।

डॉ. अनिता सिंह
2/9/2018

सोमवार, 27 अगस्त 2018

तस्वीर

तेरी तस्वीर से नज़र
हटाने का जी नहीं करता।
आँखें थक जाती है
पर दिल नहीं भरता ।
पलकें पथ निहारती है
वक्त नहीं गुजरता ।
मैं कहती दिल की बात
पर तू नहीं सुनता।
पूँछती हूँ तेरा हाल
पर ये तस्वीर नहीं बोलता।
डॉ. अनिता सिंह
27/8/2018

रविवार, 19 अगस्त 2018

मेरे मीत

ओ मेरे मीत
अब तो मेरी आहें सुन लो।
शब्द हो गये खंजर
हृदय हो गये बंजर
अब तो उन पर उग आने दो।
करुणा बह रही आँखों में
बस टीस बची है हृदय में
अब तो राह दिखा दो ।
हुई प्रार्थना व्यर्थ
यह जीवन लगता निरर्थक
पतझण के इस मौसम में
नये कोपल खिल जाने दो।
पल -पल बीत रहा जैसे
युग -युग प्रतिपल प्रतिक्षण
मत रोको मुझे अब
अपने शरण में आने दो।
भूल भूलैया है मोह -माया
राग -विराग, आमोद -प्रमोद
अब सब कुछ तज मुझे
इस जहाँ से जाने दो।

डॉ. अनिता सिंह
19/8/2018

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